गुरुवार, 5 मार्च 2009

बसंत और निराला

अभी न होगा मेरा अन्त...

अभी -अभी ही तो आया है मेरे वन में मृदुल वसंत !

अभी न होगा मेरा अन्त ............

मेरे जीवन का यह है जब प्रथम चरण

इसमे कहाँ मृत्यु है ,जीवन ही जीवन

अभी पड़ा है आगे सारा यौवन .............