
कब तक घर में बैठे रहोगे,
कब तक व्यवस्था को कोसते राहोगे
कब तक कहोगे राजनीति है भ्रष्ट
कब तक सुनाओगे दूसरो को अपना कष्ट
कब तक दोगे राज नेताओं को गाली
कब तक दोगे गिध्धों को को मांस की रखवाली
कब तक रोटी खातिर राष्ट्र को दोगे धोखा
कब तक चोरों को दोगे राजनीति में मौका
कब तक रखोगे अपने देश को मजबूर
कब तक रखोगे ख़ुद को मतदान केन्द्र से दूर
क्यों नही करते तुम अपना मतदान ?
वोट तो करो बदलेगा हिंदुस्तान!