आम आदमी का ख़त भाजपा के नाम...
भाजपा के कर्णधार महोदय, सादर वंदे।
अब जबकी १५वी लोकसभा के चुनाव परिणाम आ गए हैं, आज आपके विरोधी दल के नेता प्रधान मंत्री की दूसरी पारी शुरू करने जा रहे हैं , ऐसे में मैं आपके लिए एवं देश के उस राष्ट्रवादी धड़े के लिए कुछ नादान सवाल वाला पत्र लिख रहा हूँ ,जिस पर एक सुचिता पूर्ण राजनीति की आश लेकर जनता आज भी भरोसा करती है।:-
हमसब(देश की जनता) अब यह जान चुके हैं की राम की जय, वाम का भय, दिखा कर अवाम को संशय में नही रखा जा सकता।
# आज जबकी २१वी सदी के विकसित भारत की चर्चा हो रही है ,फिरभी भारतीय जनता पार्टी, इंडियन पब्लिक की पार्टी क्यूँ बनी हुई है?
गाँव की चर्चा बस घोषणा पत्र भर में ही क्यूँ है?
#आज भी राम रोटी के चक्कर में अवाम कहीं नही है क्यूँ?
#राष्ट्र सर्वोपरि है, एवं व्यक्ति से बड़ा दल , दल से बड़ा राष्ट्र का सिधांत आपका है फिरभी ऐसी क्या बात आगई की व्यक्ति को अच्छा दिखाने के चक्कर में राष्ट्र पीछे छूट गया?(ज्ञात हो की इसबार के प्रचार में मजबूत नेता -निर्णायक सरकार के सामने सारे मुद्दे फीके दिखे)।
# ठीक है की आडवानी जी काफी अनुभवी व्यक्ति हैं , लेकिन उनके अनुभव के आगे उनकी छवि को कोई क्यूँ स्वीकार करे?
# आपको सत्ता पाना था तो इतनी व्यग्रता आपके अंदर क्यूँ दिखी? याचक शालीन होता है कि उत्तेजित?
# लगातार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से खटास-मिठास की खबरे आने के बाद भी आज भाजपा न संघ के गोद में है न संघ से बहार ऐसा क्यूँ? एक स्पष्ट अवधारणा क्यूँ नही?
# भाजपा संघ के बिना नही रह सकती या संघ को राजनीतिक
प्रतिनिधित्व की आवश्यकता है,जहाँ केवल स्वयमसेवक ही भरे रहें?
#क्या वजह है की आज भी कथित धर्मनिरपेक्ष दल आपके साथ आने से कतराते हैं?
#गठबंधन राजनीति को सफल बनाने वाली भाजपा आज किस गलती की सजा भुगत रही है?
भारतीय जनता पार्टी को किसी भी आत्म चिंतन या मंथन के बजाये आज आत्म सुधार हेतु कार्य करने कि जरूरत है।
आपका आम आदमी........