नत करदो मस्तक मेरा अपनी चरण-धूल में,
अंहकार डूबा दो मेरा सारा अश्रूजल में।
करने स्वयं को गौरव-दान करता केवल निज अपमान,
बार बार चक्कर खा-खाकर मरता हूँ पल-पल में।
अंहकार डूबा दो मेरा सारा अश्रूजल में।
रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा रचित........