नकली घी, नकली मावा,नकली तेल, नकली दिया-नकली बाती,नकली पंडित-नकली पुजारी, नकली दान-नकली भगवान!
नकली पैसा, नकली पुलिस,नकली पत्रकार-नकली समाज!
नकली दोस्ती-नकली दुश्मनी,नकली रिश्ते-नकली प्यार, नकली घर वार, नकली गुरु-नकली चेले, फिर दिवाली को कैसे असली मान लूँ.........खुद के बारे में खुद कैसे कहूं...?
कारण एक मात्र है-ना अब वो देवी रही, ना अब वो कराह है.....