
तन स्वस्थ्य तो मन स्वस्थ्य और निरोग काया के लिए आवश्यक है आदित्य की भक्ति। यही वजह है की बिहार के लोग तीव्र बुद्धि होते हैं। छठ पर्व की महानता इसीलिए है, शासक,प्रशासक हर जगह इनकी चर्चा है कुछ लोग तो इनकी मेधा से डरते भी हैं लेकिन सब लोग राज ठाकरे के तरह नही होते। हालाँकि राज को भी छठी माता ने बहुत कुछ दिया है। कहा जाता है की घोर पापी भी अगर दुर्भावना से ही सही भगवान का नाम ले तो उसे भी धर्मी से कम पुन्य नही होता, क्योंकि वह नाम भगवान का ले रहा होता है। वही हुआ राज ठाकरे के साथ,छठ पर्व के बारे में अनाप-सनाप बोलते हुए वह अनजाने ही सही माता का नाम तो ले ही रहे थे लिहाजा महज एक साल के भीतर ही उन्हें सफलता मिली और वह अब महाराष्ट्र में पहले से अधिक शक्ति वाले हो गए हैं। यकीन मानिये अगर वे छठ पूजा कर रहे होते तो आज हालात कुछ और होती। जो जितना फिट रहेगा वह उतना हिट रहेगा यह भी मानने की बात है, यही वजह है की लालटेन की रौशनी में भी एक बिहारी छात्र बीस-बीस घंटे पढ़ लेता है क्योंकि छठ पूजा के चलते भगवान सूर्य की कृपा उस पर बनी रहती है और वह धरती के किसी भी कोने पर आसानी से वहां के वातावरण के साथ पारिवारिक हो जाता है और आसानी से जी लेता है। लोग भले ही जलते हों और उसके मेधा से इर्ष्या करते हों लेकिन कर्मवीर को फर्क नहीं पड़ता और वह सभी मुश्किलों में मुस्कुराता रहता है। मै एक आदित्यभक्त होने की वजह से यह कह रहा हूँ न की एक बिहारी होने की वजह से। आज पूरे देश भर में षष्ठी के डूबते सूर्य का अपना महत्व होता है इसलिए जहाँ जहाँ उनकी पूजा की जावेगी वहां पर कृपा जरूर बरसेगा ऐसा माना जाता है। और सूर्य कभी नहीं कहते की मै सिर्फ़ बिहारियों के लिए उगता हूँ। सम्पूर्ण देश की मेधा को बिहारियों के इस महान आस्था का लाभ पहुँचे और देश भर में लोगों का निरोग काया और स्वस्थ मन तीव्र बुद्धि हो इस आशा के साथ भगवान सूर्य को सत् सत् नमन.....