रविवार, 6 दिसंबर 2009

भारतीय क्रिकेट का 'शौर्य दिवस'




६ दिसंबर २००९ को मुंबई के ब्रेबॉन स्टेडियम में भरतीय टेस्ट क्रिकेट का शौर्य दिवस मना...लंकाई टीम के आखिरी ईंट के उखड़ते ही दक्षिण अफ्रिका की टेस्ट क्रिकेट में बादशाहत ख़त्म हो गई। वीरेंद्र सहवाग के बल्ले और जहीर खान के गेंद ने जो क़हर ढ़ाहा वह किसी के रोकने से नहीं रुक सका, धोनी के धौंस के आगे संगकारा के बांकुरे की एक न चल सकी और हम हो गए नंबर एक। एक पारी और २४ रनों की शानदार जीत भारत ने दर्ज कर ली। २-० से सीरीज़ जीतने के साथ ही विश्व रैंकिंग में भी भारत ने अपने टेस्ट क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी बढ़त ले ली।
आज से ठीक सत्रह साल पहले भगवान राम की जन्मभूमी अयोध्या में विवादित ढांचे का विध्वंस कर दिया गया था। लोग इसे कई रुप में देख रहे हैं...तब से आज तक यूं तो हर साल ६ दिसंबर को एक तबका शौर्य दिवस तो दूसरा काला दिवस मनाता आ रहा है। इस बार कुछ खास चर्चा इसलिए रही क्योंकि उस घटना के बाद गठित भारत की सबसे आलसी और नक्कारा जांच आयोग ने जिसके रिपोर्ट को संसद में रखने के बजाए उसके कुछ पन्ने फाड़ के सड़क पर किसी ने फेंक दिए और वह पन्ना एक अख़बार के पत्रकार को मिल गया, रिपोर्ट छप गई फिर संसद में लाना जरूरी समझा गया(गृह मंत्रालय की गोपनियता पर प्रश्नचिन्ह)। उस रिपोर्ट में १७०० पन्नों का सबसे बड़ा मजाक देश के साथ किया गया है। गृह मंत्री ने न तो रिपोर्ट के लिक होने को गंभीरता से लिया न ही रिपोर्ट को। बात साफ हो जानी चाहिए जब विवादित ढांचा गिराई जा रही थी तो देश में दो सरकारें नक्कारा थी...एक तो कांग्रेस की नरसिंह राव जी वाली केंद्र की सरकार और दूसरे भाजपा की कल्याण सिंह वाली उत्तर प्रदेश सरकार। जब सरकारें नहीं रोक पाई विध्वंस तो फिर राजनीतिक दलों को अब इस पर चर्चा करके नई पीढ़ी को भी जबरन उस पचड़े में फंसा कर खुद की राजनीतिक रोटियां सेकना बंद कर देनी चाहिए। क्योंकि आज की पीढ़ी शौर्य दिवस के रोज नए नए कीर्तिमान गढ़ रही है।