
राम मंदिर बनेगा...हिंदुत्व कायम रहेगा...मैं संघ का स्वयंसेवक था नहीं हूं...मेरे साथ धोखा हुआ, ठगे गए हम...ये सारी बातें आज वही व्यक्ति कर रहा है जो अभी से कुछ ही दिनों पहले भाजपा और हिंदुत्व को ठेंगा दिखाते हुए कई सारे खुलासा किया था भाजपा के हिंदुत्व के बारे में...। आज दलील यह भी है कि मेरे ही कारण पिछड़ गई भाजपा, अब पाश्चाताप करने को तैयार हूं..। शायद याद हो...लोकसभा चुनाव से ठीक पहले य़ूपी में एक रैली निकली थी उसका मक़सद था विवादित ढांचे के विध्वंस को लेकर जनता से माफ़ी मांगने का और उसके अगुआ कोई और नहीं थे यही मुलायम सिंह यादव थे और साथ में १९९२ के विवादित ढांचे के विध्वंस के समय के मुख्यमंत्री...कल्याण सिंह जी थे...। अभी से कुछ ही दिनों बाद १७ वीं बरसी होगी देश के कौमी एकता को लगे सबसे बड़े चोट की...लोग उसे कई नजरिए से देख रहे है, सैकड़ों लेखक मालामाल हो गए विध्वंस पर क़िताब लिख लिख कर...सैकड़ों लोग नेता बन गए आज तक ना तो मंदिर बन पाया न दुबारा भाजपा आ सकी...। लोगों ने भाजपा के साथ वफादारी भी की गद्दारी भी की...।भाजपा ने भी लोगों के साथ वही किया। कल्याण सिंह ने भाजपा के साथ भी और जनता के साथ भी वफाई-वेवफाई दोनों किया..। आज 'राह कौन सी जाऊं मैं' की स्तिथि में चौराहे पर खड़े ...अपने घर में आग लगा कर उजाला कर चुके हैं...दरअसल यह सब ब्लैकमेलिंग इसलिए हो पाती है क्योंकि जनता नादान की तरह देखते रहती है...राजनीति को नेताओं की जागीर समझ कर छोड़ चुकी है...।अभी हाल ही की घटना है छत्तीसगढ़ के दुर्ग ज़िले के दो पंचायतों में लोगों ने सरपंचों का हुक्का-पानी बंद कर दिया...वजह उन पर कुछ भ्रष्टाचार के आरोपों का होना था...मैं मानता हूं यह असल लोकतंत्र का इशारा है...जब लोक का डंडा पड़े तब लोकतंत्र सफल होगा..मात्र लोक के वोट देने से तो ब्लैकमेलिंग होती ही रहेगी...नेता बाग़ी ओर दाग़ी पैदा होता ही रहेगा, लेकिन यह बड़े स्तर पर भी होना चाहिए...।
ख़ैर अब तो सोचना भाजपा को है कि वह 'कल्याण' चाहती है या नहीं...।